इस पुस्तक "कान्हां... और मेरी तन्हाईयाँ" में आध्यात्मिकता और मानव विचारों के समन्वय को अद्भुत और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है.... यह पुस्तक इस दृष्टिकोण से भी बहुत प्रभावित करती है कि जीवन की सामान्य घटनायें और एकाकीपन से हम कैसे ईश्वरीय शक्ति का अनुभव करते हैं.... पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक घटनाओं, संतों के प्रवचनों, रोज़मर्रा की अपनी ज़िंदगी के अनुभवों से ओतप्रोत, यह पुस्तक निःसंदेह पाठक के मन पर एक छाप छोड़ती है... पुस्तक का कथानक हमारे द्रष्टिकोण, विचारों और जीवनशैली को प्रभावित ही नहीं करता बल्कि विचारों में परिपक्वता भी लाता है... अपने नाम के अनुरूप "कान्हां... और मेरी तन्हाईयां" पुस्तक को प्रसंगों से संबंधित शायरी, कविताओं, सारगर्भित संवादों और चित्रों ने रोचक बना दिया है, जिससे पूरी पुस्तक को पड़ने की उत्कंठा और जिज्ञासा की अनुभूति बनी रहती है.... हम इस पुस्तक के सहयोगी होने पर गर्व का अनुभव करते हैं... - प्राजक्त प्रकाशन
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