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कांचन जी की 'चित्र कविता' एक नया प्रयोग है. चित्र देखते हुए कब कविता शुरु हो जाती है और कब कविता की बात को चित्र आगे बढ़ा देता है !... यह रसीली जुगलबंदी है. परस्पर पूरक और अविभाज्य भी. ये नया है.इन चित्र कविताओं को किसी खास शैली में नहीं बांधा जा सकता... बस ! पढ़ते समय स्वाद आता है.प्रकृति की चितेरी कांचन प्रकाश संगीत के लिए हर वह चीज़ कविता का प्रयोजन बनती है जो उनके मन को छू जाती है.अनार के पेड़पर झूलती गौरैया हो या संध्यावसान पर बगीचे से उठकर गई खुशियां हों या घुटने दबाते कुछ दुखड़े खुली हवा में तरोताजा हो रहे हों.मराठी की जानी मानी साहित्यकार कवयित्री के ये हिंदी में रखे गये पुख्ता क़दम अवश्य नए हस्ताक्षर स्वरुप माने जाएंगे.पुस्तक में संग्रहितमन्तव्यों से
कांचन जी की 'चित्र कविता' एक नया प्रयोग है. चित्र देखते हुए कब कविता शुरु हो जाती है और कब कविता की बात को चित्र आगे बढ़ा देता है !... यह रसीली जुगलबंदी है. परस्पर पूरक और अविभाज्य भी. ये नया है.इन चित्र कविताओं को किसी खास शैली में नहीं बांधा जा सकता... बस ! पढ़ते समय स्वाद आता है.प्रकृति की चितेरी कांचन प्रकाश संगीत के लिए हर वह चीज़ कविता का प्रयोजन बनती है जो उनके मन को छू जाती है.अनार के पेड़पर झूलती गौरैया हो या संध्यावसान पर बगीचे से उठकर गई खुशियां हों या घुटने दबाते कुछ दुखड़े खुली हवा में तरोताजा हो रहे हों.मराठी की जानी मानी साहित्यकार कवयित्री के ये हिंदी में रखे गये पुख्ता क़दम अवश्य नए हस्ताक्षर स्वरुप माने जाएंगे.पुस्तक में संग्रहितमन्तव्यों से
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