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उर्मिला... मिथिला की विस्मृत राजकुमारी, लक्ष्मण की धर्मपरायण पत्नी ! उनकी कहानी शुरू होती है बचपन के चिंतारहित दिनों से... विवाह के मंडप में खिलती है, और फिर... मौन तथा त्याग की दिशा में एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है। जब राम के साथ लक्ष्मण वनवास चले गए, तब उर्मिला अयोध्या में रहीं, जहाँ उन्होंने चौदह लंबे वर्षों के लिए एकांत को अपनाया। कौन सी आशा उन्हें शक्ति देती रही? प्रतीक्षा के उस समय में संयमपूर्वक जीवन जीने की हिम्मत उन्हें कहाँ से मिली? अयोध्या के राजमहल में, मातृत्व के आनंद में, और दूर-दराज के दो नगरों में अपने जीवन का संध्याकाल बिताते हुए... उर्मिला ने एक ही जीवन में कई जीवन जिए।यह उपन्यास सिर्फ उनकी यात्रा को ही नहीं, बल्कि उनके विचारों की छिपी हुई दुनिया को भी उजागर करता है।
उर्मिला... मिथिला की विस्मृत राजकुमारी, लक्ष्मण की धर्मपरायण पत्नी ! उनकी कहानी शुरू होती है बचपन के चिंतारहित दिनों से... विवाह के मंडप में खिलती है, और फिर... मौन तथा त्याग की दिशा में एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है। जब राम के साथ लक्ष्मण वनवास चले गए, तब उर्मिला अयोध्या में रहीं, जहाँ उन्होंने चौदह लंबे वर्षों के लिए एकांत को अपनाया। कौन सी आशा उन्हें शक्ति देती रही? प्रतीक्षा के उस समय में संयमपूर्वक जीवन जीने की हिम्मत उन्हें कहाँ से मिली? अयोध्या के राजमहल में, मातृत्व के आनंद में, और दूर-दराज के दो नगरों में अपने जीवन का संध्याकाल बिताते हुए... उर्मिला ने एक ही जीवन में कई जीवन जिए।यह उपन्यास सिर्फ उनकी यात्रा को ही नहीं, बल्कि उनके विचारों की छिपी हुई दुनिया को भी उजागर करता है।
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