Skip to product information
‘उम्मीद भी है घबराहट भी है कि अब लोग क्या कहेंगे, और इससे ब़डा डर यह है कहीं ऐसा ना हो कि लोग कुछ भी न कहें’ - गुलजार या भावनेनंच हा कवितासंग्रह वाचकांसाठी -
हे मराठी पुस्तक वाचकांसाठी अत्यंत उपयुक्त आहे.